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Monday, April 22, 2013
Sunday, April 21, 2013
Friday, April 5, 2013
कमरा
एक गन्दा अलग कोने का कमरा
फेक दिया जाता जिसमे पुराना सामान...
या शायद वो सामान जो दिल को न भाये !
कुछ पुराने स्कूल बैग....कुछ पुरानी किताबे,
कुछ पुराने खिलोने.....कुछ पुरानी तस्वीरे.......
कहने को तो ये सब पुराना था
पर शायद जवानी के साथ मेरा बचपन इनके बीना अधूरा था !
पर अब रक्खा भी था क्या इनमे.......
सिवाए लाने के आँखों में आंसू की चंद बूंदों के....
अभी खुद को प्यारी ये वस्तुवे....
चोट सी पहुचती थी दिल को अब मेरे !
पर अब भी हिम्मत नही थी इतनी,
की निकाल फैकू इनको घर से मैं,
सायद इसीलिये रक्खी थी सहज कर,
एक गंदे....अलग कमरे में.
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