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Tuesday, July 23, 2013
Tuesday, July 9, 2013
बुनाई-ए-शब्द
बहुत तहजीब से करनी पड़ती है बुनाई शब्दों की ए-दोस्तों |
मै "चन्द्रशेखर" बुनता हू कहानियों को कविताओं में ||
मै "चन्द्रशेखर" बुनता हू कहानियों को कविताओं में ||
Saturday, July 6, 2013
शाम जो फिर बढने लगी
शाम जो फिर बढने लगी,,,
दर्द ए आवाज दिल की बढने लगी |
ली सूरज ने भी अगड़ाईयां,
चांदनी फिर बिखरने लगी |
फिर साँस थमी.......फिर आग लगी,
फिर नाम मिला......फिर शोहरत मिली |
फिर सपनो से जो मैं जागा.........
ना तुम मिली.......बस याद मिली |
दर्द ए आवाज दिल की बढने लगी |
ली सूरज ने भी अगड़ाईयां,
चांदनी फिर बिखरने लगी |
फिर साँस थमी.......फिर आग लगी,
फिर नाम मिला......फिर शोहरत मिली |
फिर सपनो से जो मैं जागा.........
ना तुम मिली.......बस याद मिली |
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