Translate

Saturday, July 6, 2013

शाम जो फिर बढने लगी

शाम जो फिर बढने लगी,,,
दर्द ए आवाज दिल की बढने लगी |
ली सूरज ने भी अगड़ाईयां,
चांदनी फिर बिखरने लगी |
फिर साँस थमी.......फिर आग लगी,
फिर नाम मिला......फिर शोहरत मिली |
फिर सपनो से जो मैं जागा.........
ना तुम मिली.......बस याद मिली |

No comments:

Post a Comment