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Wednesday, September 18, 2013

बस कुछ ऐसा तू कर जा

ये मेरे दिल को क्या हो गया,
ये मेरा मन कहा रह गया,
दीवारे पूछती है अक्सर,
ये आखिर तुझको क्या हो गया...........
क्यों डरने खुद से तू है लगा,
पीछे क्यों तू किसके पड़ा,
तू खुद है खुद् का रास्ता,
क्यों खुद से तू है छीपने लगा..............
चल निकल परदे से बाहर,
छोड़कर गुघट का दामन,
याद रख ऊचाई आसमा की,
तू उड़ तो पंख फैला कर..........
रंगों में तू रंगजा,
वादी में तू यु घुलजा,
बन जाये फ़साना अपना भी,
बस कुछ ऐसा तू कर जा................
बस कुछ ऐसा तू कर जा.......... 

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