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Friday, February 8, 2013

सोचा आज मैंने आखिर क्यों लिखता हु म अब,,


सोचा आज मैंने आखिर क्यों लिखता हु म अब,,
मायने क्या है मेरी बातों के..मेरे जज्बातों के..
अचानक सोचते सोचते आँख लग गए...
सामने जैसे सच मे तुम आई..
कहने लगी इरादा क्या है जनाब..
हम भले ही न हो करीब..
यादे तो है आपके पास..
भले ही अनकाही हो..या हो अनकही यादो  कि तस्वीरे
पर केवल आप का है उन पर अधिकार...
बस इसलिए ये पोस्ट लीख रखा हु..
म खुद मे एक अक्स की  तलाश कर रहा हु.
न जाने कहा मिलेगी वो मुझसे..
फिर भी म उसका यहा बैठा इंतज़ार कर रहा हु..

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