चंद पन्ने जो आ उकरे मेरी किताब से,आंसू आ निकले मेरी आँख से!
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Monday, February 11, 2013
ना लहरे दमकती हुई,
ना पाजेब खनकती हुई,
ना सितारे चमकते हुवे,
ना पक्षी दोड़ते हुवे,
ना काजल है आंखो में,
ना होठ फफकते हुवे,
ना दरिया बहता हुआ,
ना शाम रूकती हुई,
बस आँखे है मेरे बहती हुई,
दिल में कुछ यादे लिए.....
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