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Tuesday, March 26, 2013

मेरी जिंदगी


सांज ढलती,चलती हवा,
और कही दूर डूबता सूरज......
लगता जैसे निगल जाइयेगा सारी खुशिया,
रात अंधेरी बन कर काल !
बिखर जाइयेगी वो पन्ने जिनमे,
दर्ज था कहानिया बन कर इतिहास.....
जल जायेगी यादे सारी,
जो देती थी होठो पर हलकी मुस्कान !
ना होगी किसी खुशी की आहट,
ना होगा कोई तीज –त्योहार !
पलके सूझती...मद्दम पड़ती मेरी साँस.........
सोजाऊगा मैं हमेशा के लिये,
बंद करके अपनी आँख !
अधूरे सपने रह जायेगे,
नदिया में बह जायेगे...........
दूर बीखरते मेरे वो कण,
फिर भी था उनमे एक अपनापन !
पर ना होगे मैयने उनके,
ना होगा कोई शाब्दिक अर्थ........
चलता चाँद.....चमकते तारे,
और एक विराम चिन्ह,
मेरी जिंदगी में लगने को तैयार !

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