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Saturday, March 16, 2013

चेहरे

आदमी के कई चेहरे है |
कुछ चेहरों की चमकती खुशी आईने में है,  
कभी चेहरे गम लिए परदे में है|
कुछ चेहरे महफ़िल में है,
कुछ धूधते अपनों को छाया में है|
नादान है कुछ चेहरे अभी तक,
कुछ खुनी कुछ शैतान भी है |
कुछ अनजान है अपने ही चेहरे से.......
कुछ भटकते रास्तो में है |
कुछ चेहरे अभी तक खामोश है...
कुछ परिंदों की तरह उड़ते मदहोश है|
कुछ तकते सुबह अकबार में सुर्खिया,
कुछ बनते खबर अपने आप है |
टूटे है कुछ चेहरे........
कुछ चेहरे है बिखरे हुवे |
कुछ सोये है कब्र में गहरी साँस लेकर,
कुछ जागे है अभी माँ की गोद से अग्डाई लेकर|

   

2 comments:

  1. बहुत अच्छे भाई. हिज्जे की कुछ गलतियाँ है, सुधर लें तो बेहतर होगा.

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  2. धन्यवाद भाई........ म अपनी पूरी कोशिश करूगा अपनी गलतियों को सुधारने की













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