Translate

Wednesday, May 29, 2013

सजदा

सपने में कल एक हूर परी आई,
कहने लगी , उठ् जा........सजदे को तोसे आई |
हो के जुदा अब तोसे,
मै जी कैसे पाऊ ?
आंसू संग बहू,
और माटी में मिल मिल जाऊ |
कहने लगा मैं,
दूर थी तुम पर करीब दिल के रही,
अब तो सोते हुवे भी रहती आँखे मेरी खुली |
सपने में कल एक हूर परी आई,
कहने लगी ,
कैसे रिश्ते है ये और कैसे है नाते,
यही कही पर है सब अपने खो जाते |
दुनिया है छोटी से,
मुझको तो तू अपनी बाहों में पनहा दे,

थोडा रोने दे मुझे,
थोडा सकून दे |
जल जाने दे ये दुनिया ,
मुझे तो अपनी बाहों में पनहा दे |
कहने लगा मै,  
चल कोई नई दुनिया बना ले |
बंद कर आँखे और मुझे उनमें बसा ले ,
ना देखे जग मुझे,
ना मै चाहू देखन |

मुझको सनम तू बस अपना बना ले |

No comments:

Post a Comment